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What is Zero Budget Natural Farming. (ZBNF) क्या है?

What is  Zero Budget Natural Farming.


 बिना ज्यादा लागत के खेती कैसे करें? जानिए सुभाष पालेकर की  Zero Budget Natural Farming, जिससे किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं और ज़मीन की उर्वरता भी बनी रहती है।


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भूमिका:

भारतीय कृषि की रीढ़ किसानों को लंबे समय से रासायनिक खाद, कीटनाशकों और महंगे बीजों पर निर्भर रहना पड़ा है। इससे खेती की लागत तो बढ़ी ही, मिट्टी की गुणवत्ता और किसानों की आमदनी पर भी असर पड़ा। इसी समस्या का समाधान लेकर आए सुभाष पालेकर, जिन्होंने Zero Budget Natural Farming (ZBNF) का मॉडल दिया। यह खेती पद्धति न सिर्फ लागत को शून्य करती है, बल्कि पर्यावरण और मिट्टी के लिए भी लाभदायक है।



What is  Zero Budget Natural Farming/ZBNF क्या है?

Zero Budget Natural Farming (ZBNF) एक ऐसी जैविक खेती प्रणाली है जिसमें रासायनिक इनपुट्स की जरूरत नहीं होती। इसमें किसान स्थानीय संसाधनों जैसे गोबर, गौमूत्र, नीम, तुलसी, हल्दी आदि को इस्तेमाल में लिया जाता है, “Zero Budget” का मतलब जैसा कि नाम से ही प्रतीत हो रहा है , यहाँ पर  खेती के लिए बाहर से कुछ खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती — सारा संसाधन अपने घर यानी खेत और पशुओं से ही प्राप्त हो जाता है।



ZBNF के चार प्रमुख स्तंभ:

  1. जीवामृत
    • यह एक तरल घोल होता है जो गाय के गोबर, गौमूत्र, गुड़, बेसन और मिट्टी से तैयार किया जाता है।
    • यह खेत की मिट्टी में सूक्ष्मजीवों को बढ़ाता है जो फसल के लिए फायदेमंद होते हैं।
  2. बीजामृत
    • बीज को बोने से पहले इस घोल में डुबोया जाता है।
    • यह बीज को रोगमुक्त करता है और अंकुरण दर बढ़ाता है।

  3. अच्‍छादन (मल्चिंग)
    • खेत की मिट्टी को धूप और हवा से बचाने के लिए पौधों की सूखी पत्तियाँ, घास आदि का उपयोग किया जाता है।
    • इससे नमी बनी रहती है और खरपतवार कम होते हैं।
  4. वापसा (Moisture Retention)
    • इसका मतलब है खेत में नमी बनाए रखना, ना कि ज्यादा सिंचाई।
    • इस सिद्धांत के अनुसार पौधे को पानी नहीं, नमी चाहिए।

Zero Budget Natural Farming के लाभ:

  • लागत में भारी कमी: न बीज खरीदने की ज़रूरत, न खाद, न ही कीटनाशक।
  • मिट्टी की उर्वरता में सुधार: रासायनिक खादों के स्थान पर जैविक इनपुट से मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है।
  • स्वस्थ फसलें: कीटनाशकों के बिना फसलें ज़्यादा पोषक और सुरक्षित होती हैं।
  • किसान आत्मनिर्भर बनता है: अपने खेत और पशु से सभी आवश्यक चीजें मिल जाती हैं।
  • पर्यावरण संरक्षण: कोई प्रदूषण नहीं होता, जल संरक्षण होता है।


ZBNF और सरकार की भूमिका:

भारत सरकार और कई राज्य सरकारें ZBNF को बढ़ावा दे रही हैं। आंध्र प्रदेश में ZBNF को बड़े स्तर पर अपनाया गया है और वहां इसके अच्छे परिणाम भी मिले हैं। सरकार प्रशिक्षण शिविर, जागरूकता अभियान और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है।

किन किसानों को अपनाना चाहिए?

  • छोटे और सीमांत किसान जिन्हें हर सीजन में कर्ज लेना पड़ता है।
  • जैविक खेती की ओर रुझान रखने वाले किसान।
  • वे किसान जो मिट्टी की सेहत को बचाना चाहते हैं।
  • जिनके पास देशी गाय है या वे देशी संसाधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

 जैविक खेती और प्राकृतिक खेती में क्या फर्क है? पूरी जानकारी

ZBNF और स्थानीय समुदायों की भूमिका 

Zero Budget Natural Farming किसानों के साथ साथ यह ग्रामीण समुदायों की भी आमदनी बढ़ाने में सहायक है, इसे कुछ इस तरीके से समझा जा सकता है की जब किसान स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हैं, तो उन्हें बाहरी बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे न केवल खर्च में कटौती होती है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। साथ ही, ग्रामीण युवाओं को भी ZBNF के ज़रिए खेती में रुचि लेने और स्वरोज़गार की दिशा में काम करने का मौका मिलता है।

पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव

ZBNF का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल पद्धति है। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से मिट्टी, जल और वायु प्रदूषित होती है, जबकि ZBNF के माध्यम से पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है। यह प्रणाली मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखती है और जैव विविधता को भी प्रोत्साहित करती है। जल संरक्षण, कार्बन फुटप्रिंट में कमी और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा — ये सब ZBNF के जरिए संभव हैं।

किसानों की सफलता की कहानियां

देशभर में कई ऐसे किसान हैं जिन्होंने ZBNF को अपनाकर अपनी किस्मत बदली है। उदाहरण के तौर पर, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र के हजारों किसानों ने इस तकनीक को अपनाकर खेती में लागत घटाई और उत्पादन बढ़ाया। कई किसान अब अपने खेतों से ज़्यादा मुनाफा कमा रहे हैं, और रासायनिक खादों के झंझट से भी मुक्त हो गए हैं। ऐसे प्रेरणादायक अनुभवों से अन्य किसानों को भी हौसला और मार्गदर्शन मिलता है।


Zero Budget Natural Farming अपनाने के लिए सुझाव:

  1. प्रशिक्षण लें: सुभाष पालेकर कृषि पाठशालाओं से ट्रेनिंग प्राप्त करें।
  2. स्थानीय संसाधनों की पहचान करें: जैसे गाय, नीम, तुलसी, हल्दी आदि।
  3. छोटे स्तर से शुरुआत करें: पहले 1-2 बीघा में प्रयोग करें।
  4. अनुभव साझा करें: आस-पास के किसानों को भी प्रेरित करें।


निष्कर्ष:


Zero Budget Natural Farming आज के समय में खेती की दिशा बदलने वाली प्रणाली है। यह न सिर्फ खेती को किफायती बनाती है, बल्कि किसान को आत्मनिर्भर, मिट्टी को उपजाऊ और समाज को स्वस्थ भोजन प्रदान करती है। सुभाष पालेकर द्वारा विकसित यह प्रणाली लाखों किसानों के जीवन में बदलाव ला चुकी है।

FAQs:

Q1: ZBNF में रासायनिक खाद या कीटनाशक का प्रयोग होता है क्या?

नहीं, ZBNF पूरी तरह जैविक है और किसी भी रासायनिक इनपुट का उपयोग नहीं होता।


Q2: क्या ZBNF सिर्फ गाय पालने वाले किसान ही कर सकते हैं?

देशी गाय के गोबर और गौमूत्र का इस्तेमाल बेहतर होता है, पर अन्य वैकल्पिक संसाधनों का भी उपयोग किया जा सकता है।


Q3: ZBNF में कौन-कौन सी फसलें ली जा सकती हैं?

धान, गेहूं, सब्जियाँ, दलहन, तिलहन आदि सभी फसलें ली जा सकती हैं।


Q4: क्या ZBNF से उत्पादन कम होता है?

शुरुआत में थोड़ा अंतर हो सकता है लेकिन 2–3 सीजन बाद उत्पादन स्थिर और बेहतर हो जाता है।


Q5: कहां से प्रशिक्षण लिया जा सकता है?

सुभाष पालेकर कृषि पाठशाला या राज्य सरकार द्वारा आयोजित जैविक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रमों से।






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