क्या जैविक खेती में रासायनिक खाद का बिल्कुल उपयोग नहीं होता?
क्या हम जैविक खेती को पूर्णतः रासायन मुक्त खेती कह सकते है? क्या इसमें रासायनिक खादों का कोई स्थान है? जानिए इसका सच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नियम और व्यवहारिक पक्ष।

🔰 भूमिका
जब भी हम "जैविक खेती" (Organic Farming) का नाम सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहली छवि बनती है – एक पूरी तरह रासायन मुक्त खेती की। लेकिन एक बड़ा सवाल सामने आता है:
क्या जैविक खेती में रासायनिक खाद का बिल्कुल भी उपयोग नहीं होता?
इस सवाल का उत्तर जानने से पहले हमें यह समझना ज़रूरी है कि जैविक खेती का असल उद्देश्य क्या है, इसके नियम क्या कहते हैं और व्यवहारिक रूप में किसान क्या करते हैं।
जैविक खेती एक ऐसी खेती पद्धति है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करके भूमि की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखा जाता है, पर्यावरण की रक्षा की जाती है, और रसायनों के बिना फसल का उत्पादन किया जाता है।
यह खेती मुख्यतः निम्नलिखित बातों पर आधारित होती है:
जैविक खादों का उपयोग (जैसे गोबर खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट)
जैविक कीटनाशकों और रोगनाशकों का प्रयोग
फसल चक्र (Crop Rotation)
हरी खाद, जीवामृत और प्राकृतिक संसाधन आधारित तकनीकें
🚫 तो क्या रासायनिक खाद का कोई स्थान नहीं?
✅ आदर्श रूप से (Ideally):नहीं।
जैविक खेती में रासायनिक खाद या कीटनाशक का कोई स्थान नहीं होता!!
📜 जैविक खेती से जुड़े नियम क्या कहते हैं?
1. NPOP के तहत किसी भी रासायनिक खाद, कीटनाशक, फफूंदनाशी या हार्मोन का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
जैविक प्रमाणन पाने के लिए खेत को कम से कम 3 साल तक रसायन मुक्त रखना होता है।
2. PGS-India (Participatory Guarantee System):
किसान समुदाय द्वारा प्रमाणित प्रणाली।
किसी भी रूप में रासायनिक अवशेष पाए जाने पर प्रमाणन निरस्त किया जा सकता है।
🌿 फिर किसान क्या करते हैं?
✅ संक्रमण काल (Transition Phase):
जब कोई किसान पारंपरिक (रासायनिक) खेती से जैविक खेती की ओर बढ़ता है, तो पहले 2–3 साल वह पूरी तरह रसायन छोड़ना आसान नहीं पाता।
इस दौरान कुछ किसान कम मात्रा में यूरिया या DAP का प्रयोग करते हैं, लेकिन यह जैविक प्रमाणन में मान्य नहीं होता।
✅ जैविक विकल्प अपनाने की प्रक्रिया:
हरी खाद, गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत आदि से किसान मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हैं।
जैविक फसल को पोषण देने के लिए बायोफर्टिलाइज़र और प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है।
🧪 जैविक बनाम रासायनिक खाद – तुलना
विषय जैविक खाद रासायनिक खाद
उत्पादन धीमा लेकिन स्थायी त्वरित लेकिन अस्थायी
मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है समय के साथ खराब होती है
लागत कम (स्वनिर्मित हो सकता है) ज़्यादा
फसल का पोषण सम्पूर्ण पोषण एक या दो पोषक तत्व
पर्यावरण पर असर सकारात्मक प्रदूषणकारी
🧘 जैविक खेती में रासायन से दूरी क्यों ज़रूरी है?
- मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए
- पर्यावरण और जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए
- मानव स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए
- जैव विविधता को बचाने के लिए
- भविष्य की पीढ़ियों के लिए सतत खेती का आधार बनाने के लिए
📈 क्यों कुछ किसान रासायनिक खादों की ओर लौटते हैं?
❌ संभावित कारण:
- जैविक खादों से उपज में गिरावट महसूस होना (शुरुआती 2–3 साल)
- बाजार में जैविक उत्पाद की सही कीमत न मिलना
- प्राकृतिक खाद बनाने की प्रक्रिया में समय और मेहनत लगना
- जानकारी और प्रशिक्षण की कमी
👉 समाधान: किसानों को ज़रूरत है प्रशिक्षण, समर्थन, बाजार से जुड़ाव और सरकार की सहायता की।
🔍 विशेषज्ञों की राय
“जैविक खेती पूरी तरह से रसायन मुक्त होनी चाहिए, तभी उसका सही लाभ मिलेगा – चाहे वह उपभोक्ता हो, किसान या प्रकृति।”
– डॉ. वन्दना शिवा (जैविक आंदोलन की प्रमुख हस्ती)
“जैविक खेती में शुरुआत में कुछ गिरावट हो सकती है, लेकिन मिट्टी जब जागती है, तो उत्पादन भी वापस आता है – और वह स्थायी होता है।”
– सुभाष पालेकर (ZBNF – Zero Budget Natural Farming के जनक)
🌾 सरकार और संस्थाओं का समर्थन
- ICAR, NCOF, NABARD, Krishi Vigyan Kendra जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण और मदद देते हैं।
- PM-PRANAM योजना – रासायनिक खाद के उपयोग में कमी लाने के लिए।
PKVY (Paramparagat Krishi Vikas Yojana) – किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित एवं सहायता भी प्रदान करती है !!
✅ निष्कर्ष
तो क्या जैविक खेती में रासायनिक खाद का बिल्कुल उपयोग नहीं होता?
उत्तर है – नहीं होना चाहिए।
सच्चे अर्थों में जैविक खेती का मतलब है प्राकृतिक संसाधनों से खेती, रसायन मुक्त खेती और पर्यावरण के साथ तालमेल में खेती।
यदि किसान शुरुआत में मजबूरी में कुछ प्रयोग कर भी लेते हैं, तो उसे धीरे-धीरे छोड़ देना ही सही रास्ता है। तभी जैविक खेती का असली मकसद पूरा होगा।
🙋♂️ FAQs: जैविक खेती में रासायनिक खाद को लेकर आम सवाल
❓ Q1. क्या जैविक खेती में यूरिया या DAP का उपयोग किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं। ये दोनों रासायनिक खादें हैं और जैविक खेती में पूरी तरह वर्जित हैं।
❓ Q2. अगर खेत में पहले रासायन डाला गया हो, तो क्या जैविक खेती शुरू की जा सकती है?
उत्तर: हां, लेकिन कम से कम 3 साल तक रसायन का प्रयोग बंद कर प्राकृतिक तरीकों से भूमि को शुद्ध करना ज़रूरी है।
❓ Q3. जैविक खेती में कौन-कौन सी खादें मान्य हैं?
उत्तर: गोबर खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, हरी खाद, फर्मेन्टेड गोमूत्र आदि।
❓ Q4. क्या आर्गेनिक सर्टिफिकेशन मिलने के बाद कभी रसायन का उपयोग किया जा सकता है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। यदि प्रमाणन के बाद रसायन का प्रयोग पाया गया तो प्रमाणन रद्द हो सकता है।
❓ Q5. क्या कोई योजना है जो जैविक खेती को बढ़ावा देती है?
उत्तर: हां, भारत सरकार की PKVY, MOVCDNER जैसी और अन्य योजनाएं जैविक खेती को बढ़ावा देती हैं।
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